मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मैहला में किया खुलासा, 6 रुपये प्रति यूनिट की दर से सालाना 500 करोड़ और 15.50 रुपये की दर से 1000 करोड़ रुपये राजस्व मिलने का जताया अनुमान
देवभूमि न्यूज 24
मैहला (चंबा)। अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हिमाचल प्रदेश को बीबीएमबी (भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड) के 15 साल पुराने एरियर मामले में बड़ी कामयाबी मिली है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के पक्ष में फैसला सुनाया है। फैसले के अनुसार हिमाचल को 55 करोड़ यूनिट बिजली मिलेगी, जिसे बीबीएमबी को अगले 20 वर्षों में प्रदेश को देना होगा।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने चंबा जिला के मैहला में इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि यदि सरकार इस बिजली को 6 रुपये प्रति यूनिट की दर से भी बेचती है तो प्रदेश को सालाना लगभग 500 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। वहीं, यदि राजस्थान की तर्ज पर अन्य राज्यों के साथ 15.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद समझौता होता है तो प्रदेश को प्रतिवर्ष करीब 1000 करोड़ रुपये का राजस्व मिल सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि नीयत नेक हो, इच्छाशक्ति मजबूत हो और लगन के साथ प्रयास किए जाएं तो बड़ी से बड़ी लड़ाई भी जीती जा सकती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने अपने चार साल के कार्यकाल में हिमाचल के अधिकारों से जुड़े चार बड़े मामलों में लड़ाई लड़ी है और सफलता हासिल की है। वाइल्ड फ्लावर हॉल, जेएसडब्ल्यू और किशाऊ बांध से जुड़े मामलों में भी सरकार अपने हक की लड़ाई लड़ चुकी है।
उन्होंने इस उपलब्धि के लिए मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों, अधिकारियों तथा सुप्रीम कोर्ट में बीबीएमबी का मामला लड़ रहे अधिवक्ताओं का आभार व्यक्त किया।
भाजपा पर मुख्यमंत्री ने साधा निशाना
मुख्यमंत्री सुक्खू ने बीबीएमबी मामले को लेकर भाजपा पर भी निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि पूर्ववर्ती डबल इंजन सरकार ने हिमाचल प्रदेश के अधिकारों की लड़ाई क्यों नहीं लड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा प्रदेश के हितों की रक्षा और संरक्षण करने में विफल रही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने जिन मुद्दों को लेकर संघर्ष किया, उनमें सफलता हासिल की है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने हिमाचल के हितों को नजरअंदाज किया और प्रदेश के अधिकारों की लड़ाई लड़ने के बजाय विधायकों की राजनीति में उलझी रही। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने व्यक्तिगत हितों के बजाय हिमाचल प्रदेश के हितों को प्राथमिकता दी है।
वाटर सेस और चंडीगढ़ में हिमाचल के हक की लड़ाई अभी बाकी
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के अधिकारों की लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है। वाटर सेस और चंडीगढ़ में हिमाचल प्रदेश के हिस्से को लेकर संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि आरडीजी बंद होने के बावजूद उन्हें पूरा विश्वास है कि वर्ष 2032 तक हिमाचल प्रदेश देश का सबसे अमीर और समृद्धशाली राज्य बनेगा।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार लगातार हिमाचल के अधिकारों को हासिल करने की दिशा में काम कर रही है। जैसे-जैसे प्रदेश को उसके अधिकार मिल रहे हैं, वैसे-वैसे उनका लाभ आम जनता तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था सहित विभिन्न क्षेत्रों में नई योजनाएं लागू कर रही है।
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