ऊना के श्री स्वयंम्भू शिवलिंग शिवबाड़ी गगरेट को धार्मिक पर्यटन स्थल विकसित किया जाए-राजीव शर्मन

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ऊना के श्री स्वयंम्भू शिवलिंग शिवबाड़ी गगरेट को धार्मिक पर्यटन स्थल विकसित किया जाए-राजीव शर्मन

देवभूमि न्यूज डेस्क
ऊना (हि. प्र.)

हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना की पौराणिक स्वर्णिम स्वर्ग नदी “सोमभद्रा-स्वां नदी”के समीप “श्री छोटा हरिद्वार” महातीर्थ स्थल: श्री शिवमन्दिर शिवबाड़ी गगरेट बसा हुआ है लम्बे समय से
श्री स्वयंम्भू शिवलिंग शिवबाड़ी गगरेट को धार्मिक पर्यटन स्थल विकसित करवाने की दरकार है।लेकिन सरकार की नजरे अभी तक इनायत नही हुई है

हिमाचल प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन ऊना को सोमभद्रा-स्वां नदी तट पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर गगरेट शिवबाड़ी में धार्मिक श्रद्धालुओं हेतु धार्मिक पर्यटन स्थल विकसित करवाना चाहिए।

हिमाचल प्रदेश देवी देवताओं की पुन्य भूमि है। जिला ऊना के शक्ति पीठ श्री छिन्न मस्तिकाधाम माता चिंतपूर्णी जी से मात्र 18 किलोमीटर दूर स्थित श्री शिवमन्दिर स्वयंभू शिवलिंग शिवबाड़ी प्रमुख महातीर्थ है। हिमाचल प्रदेश को श्री छोटा हरिद्वार उपनाम अलंकृत करवाने और बनवाने में जिला ऊना का यह पांच हजार सालों से भी ज्यादा पुराना श्री शिवमन्दिर शिवबाड़ी गगरेट जिला ऊना सारे उत्तर भारत में प्रसिद्ध है।

प्राचीन द्रोणाचार्य शिव मंदिर गगरेट में सोमभद्रा-स्वां नदी तट समीप आज से पांच हजार वर्ष पूर्व स्वंय सदाशिव स्वयम्भू भगवान जी द्वारा स्थापित माना जाता है। आचार्य द्रोण ने पांडवों और कौरवों को यहीं धनुर्विद्या सिखाई थी। गुरु द्रोणाचार्य स्वर्ग से बहती आई सोमभद्रा-स्वां नदी में पवित्र स्नान कर इसे जिला ऊना का वर्तमान का “श्री छोटा हरिद्वार” साकार करा गये है।

आज भी हर साल वैशाखी पर्व के दूसरे शनिवार को यहां शिवबाड़ी शिव मंदिर गगरेट में बड़ा भारी मेला लगता आया है। कहते हैं कि स्वयं श्री सदाशिव महादेवन जी भक्तों को इस दिन आने पर अलौकिक अहैतुक कृपादृष्टि बरसाते हैं। इस दिन और महाशिवरात्रि के चार पहरों की पूजा करने वाले शैव भक्तों के सभी मनोकामनाएं यहां पूर्ण होती आई है। कहते हैं कि द्वापुर युग में आज से पांच हजार सालों से भी ज्यादा समय में जब गुरु द्रोणाचार्य यहां अपनी दिव्य सुपुत्री यजायती संग शिववाड़ी के प्राचीन चार कुओं समीप तपस्यारत रहकर यहां से परकाय निर्वाण द्वारा हिमालय में भगवान श्री सदाशिव की स्तुति हेतु गमन करते थे। आचार्य की सुपुत्री यजायिती ने भी हिमालय पर्वत जाने का हठ किया। गुरु द्रोण ने यजायती को भगवान शिवजी के पंचाक्षरी मंत्र ओम नमः शिवाय जपने की आज्ञा देकर यहां शिवबाड़ी गगरेट में ही तपस्या रत होकर श्री सदाशिव को साकार करने का अलौकिक मार्ग सुझाया था। भगवान भोलेनाथ तो आशुतोष कहलाते हैं,वह जल्दी ही प्रसन्न हो जाया करते हैं। श्री शिवजी यजायती की तपस्या से प्रसन्न होकर शिवबाड़ी गगरेट में बाल रूप में नित्य प्रति आकर यजायती के साथ खेलने लगे। एक दिन यजायती ने अपने पिता श्री द्रोणाचार्य जी को बालक के नित्यप्रति आकर खेल रचाने का प्रसंग सुनाया। उसके अगले दिन गुरु द्रोण हिमालय की कंदराओं में जल्दी से ही सांयकाल से पहले दोपहर में ही अपनी सुपुत्री यजायिती के पास वापिस लौटे। शिववाड़ी गगरेट में गुरू द्रोणाचार्य ने भगवान श्री सदाशिव महादेवन जी की अलौकिक कृपा देखी कि स्वयं भगवान शिव ही बालक रूप में नित्यप्रति यजायती के साथ खेला करते हैं। गुरु द्रोण ने भगवान श्री सदाशिव को दंडवत प्रणाम किया और यजायती को भी भगवान श्री शिवजी ने साक्षात् दर्शन देकर आशीर्वाद दिया। यजायती ने भगवान श्री शिवजी को यहीं शिवबाड़ी गगरेट में ही रहने का हठ किया। भगवान श्री सदाशिव ने बालिका हठ को सहर्ष स्वीकार करते हुए कहा कि वह सकल ब्रह्म्मांड में द्वादश लिंगों के माध्यम से सभी जगह विराजमान हैं। उनका सकल सृष्टि में विस्तार है,वह यहां शिवबाड़ी गगरेट में लम्बे समय तक नहीं टिक सकते। श्री सदाशिव महादेवन जी ने गुरू द्रोणाचार्य व उनकी सुपुत्री की तपस्या से प्रसन्न होकर वरदान दिया कि वह साल में एक बार अवश्य ही शिवबाड़ी गगरेट में सशरीर हर साल प्रकट हो जाया करेंगे।

आज भी श्रद्धालुओं की मान्यता है कि शिवजी यजायती और गुरु द्रोणाचार्य को दिये बचन पर सदैव बचनबद्ध होकर हर साल वैशाखी पर्व के दूसरे शनिवार को यहां भक्तों को दर्शन देकर निहाल करते हैं। पिछले हजार सालों से जिला ऊना के शिवबाड़ी गगरेट में वैशाखी पर्व के दूसरे शनिवार को यहां बड़ा भारी मेला अनवरत आयोजित किया जा रहा है।

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा से इस महातीर्थ की दूरी लगभग 100 किलोमीटर, जालन्धर पंजाब से 75 व जिला ऊना मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर है। कालांतर में अनेकों महात्माओं ने यहां भगवान श्री सदाशिव महादेवन के दर्शन पाकर मरणोपरांत अपनी समाधियां यहां बनवाने की अंतिम इच्छानुसार परम गति व अलौकिक ऐश्वर्य प्राप्त किया है। इन सिद्ध महात्माओं में श्री बलदेव गिरी,श्री इच्छा गिरी, श्री तमेश्वर गिरी,श्री गंगागिरी जी की समाधियां यहां आज भी विद्यमान है और श्रद्धालु यहां नतमस्तक होते हैं। पुराने बुजुर्गों और इलाका वासियों का अटूट विश्वास है कि यहां पर लोगो को इन चमत्कारिक महात्माओं के भी दर्शन होते हैं। मंदिर में पूजा करने वाले वर्तमान पंडित जी सुनाते हैं कि जब मुस्लिम शासकों ने हिंदूस्तान के मंदिरों में लूट-पाट करते करते गगरेट शिवबाड़ी में प्रवेश करना चाहा तो जनेऊओं (यज्ञोपवीतों) का रक्षा कवच मुस्लिम सेना के लिए बाधक बना। इस पर मुस्लिम शासक ने शिवबाड़ी गगरेट के स्वयंम्भू शिवलिंग की जलैहरी को तोड़ने का आदेश दिया। किंतु श्री सदाशिव महादेवन शिवबाड़ी के स्वयंम्भू शिवलिंग से हजारों की संख्या में जहरीले लाल विषधरों ने फूंकारना शुरू किया तो मुस्लिम सैनिक भाग खड़े हुए। मुस्लिम शासक थोड़ी देर के लिए अंधा हो गया। उसे कहीं मार्ग नहीं मिल रहा था। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ तो उसने श्री शिवबाड़ी गगरेट शिव मंदिर के स्वयंम्भू शिवलिंग पर नतमस्तक होकर क्षमा याचना की तो मंदिर के तत्कालीन पुजारी ने उस पर जलैहरी का निर्वाण जल छिड़का तदुपरान्त वह मुस्लिम शासक वहां से चला गया था।

श्री सदाशिव शिवमन्दिर शिवबाड़ी गगरेट में भगवान श्री शिवजी के स्वयंम्भू शिवलिंग के अतिरिक्त वीरभद्र,कार्तिकेय जी, नंदीश्वर, कुबेर की प्रतिमाएं भी भक्तों और श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी रहती है। श्री शिवबाड़ी गगरेट शिव मंदिर आज भी घने लकड़ी के जंगलों में बसा हुआ है। इस जंगल की लकड़ी केवल मृतकों के दाह-संस्कार (अंतेयष्ठि) हवन और मंदिर के लंगर प्रसाद व साधुओं के लिए भोजन बनवाने हेतु ही प्रयुक्त की जाती है। जिसने भी मंदिर परिसर की लकड़ी का दूरुपयोग अथवा निजी स्वार्थ साधने की आज तक कोशिश या हिमाकत की उसे स्वयं भगवान शिव ने अवश्य ही दंडित किया है। शिवबाड़ी गगरेट शिव मंदिर परिसर की लकड़ी कोई नहीं ले जाता है।ऐसा शाश्वत सत्य सारे भारतवर्ष में यहीं चरितार्थ होता है।

श्रावणमास में भी शिवमन्दिर शिवबाड़ी गगरेट में भक्तों की लम्बी कतार लगी रहती है। वर्तमान में शिवबाड़ी का प्रबंधन एस०डी०एम० गगरेट , तहसीलदार राजस्व घनारी उपतहसील कार्यालय की देखरेख में चल रहा है।
शिवबाड़ी गगरेट के श्मशान घाट का जीर्णोद्धार व पुराने चारों कुओं का रख-रखाव व सोमभद्रा-स्वां नदी तट समीप पर्वों पर महातीर्थ स्नान हेतु स्नानघाट और धार्मिक पर्यटन हेतु चंडीगढ़ की सुखना झील की तर्ज पर
“सोमभद्रा-स्वां झील” निर्माण की चिरकाल से ही मांग चली आ रही है। श्री शिव मंदिर शिववाड़ी गगरेट को सोमभद्रा-स्वां नदी तट की ओर से भी धार्मिक पर्यटकों हेतु सजाया-संवारा जाना चाहिए। इसके लिए हिमाचल प्रदेश सरकार को इस स्थल को धार्मिक पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित किया जाना चाहिए।