हिमाचल विधानसभा इलैक्शन परवान, सरकार मेहरबान!
बिजली-पानी बिलों का नहीं महीनों से फ़रमान-राजीव शर्मन
देवभूमि न्यूज डेस्क
हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों के नज़दीक आते ही हिमाचल प्रदेश सरकार ने उपभोक्ताओं को बिजली-पानी के बिल देना बंद कर दिए हैं।जिससे इन चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है कि किसी चुनावी रणनीति ने सरकार ने शायद उपभोक्ताओं को बिजली-पानी मुफ्त मुहैया करवाने की सौगात देने का मन बना लिया है।

इससे आम आदमी पार्टी को बड़े जोर का धक्का लगना लाजमी माना जा रहा है। करीब दो महीनों से १२५ युनिट बिजली मुफ़्त देने की घोषणा के बाद बिजली बिलों का ना आना रहस्य बना हुआ है।
सोशल मीडिया एक्टीविस्ट राजीव शर्मन् ने बताया कि एक साल से पानी का बिल ना आना भी रहस्य बना हुआ है। इससे कयास लगाए जाने लगे हैं कि सरकार ने बिजली-पानी मुफ्त देने की घोषणा का मन बना कर मिशन रिपीट की वैतरणी पार करने का निर्णय लिया है?
ग्रामीण क्षेत्रों में पानी-बिजली के बिलों का वितरण ना होने से दिहाड़ीदार मजदूरों, किसानों और आम जनमानस ने राहत की सांस ली है।
अब देखना यह है कि सचमुच में वर्तमान हिमाचल प्रदेश सरकार इस बारे कोई दीर्घ गामी फैसला लेकर वोटरों को अपने पक्ष में करने में कामयाब हो पाती है अथवा नहीं?
बहरहाल हिमाचल प्रदेश में पानी-बिजली बिलों का भुगतान हेतु उपभोक्ताओं को ना मिलने से मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की जमीन खिसकती नजर आ रही है।
वास्तव में आने वाले दो महीनों में पार्टियों द्वारा चुनावी घोषणापत्र को भी अंतिम रूप दिया जाना वांछित है।
ऐसे में कहीं सत्ताधारी भाजपा सरकार ने हिमाचल प्रदेश में बिजली पानी मुफ्त देने का ऐतिहासिक निर्णय लेकर मिशन रिपीट को साकार करने की योजना तो नहीं बनाई है?
यह तो भविष्य के गर्भ में ही छुपा हुआ है। काबिले गौर है कि मतदाताओं को वशीभूत करने में पानी-बिजली मुफ्त मुहैया करवाने की जद्दोजहद भी हो सकती है।