जिला ऊना का पांच हजार साल पुराना पांडवकालीन श्री सदाशिव महादेवन को धार्मिक पर्यटन स्थल बनवाया जाये

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जिला ऊना का पांच हजार साल पुराना पांडवकालीन श्री सदाशिव महादेवन को धार्मिक पर्यटन स्थल बनवाया जाये

देवभूमि न्यूज डेस्क
ऊना

जिला ऊना के प्राचीन पांडवकालीन महातीर्थ श्री ध्यूंसर महादेव श्री सदाशिव मंदिर को जाने वाले मार्ग का चौड़ीकरण किया जा रहा है। इसके चलते धार्मिक पर्यटन को विकसित करवाने की गर्ज से एक बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल होगी। धार्मिक श्रद्धालुओं की मांग है कि श्री सदाशिव मंदिर को जाने वाले रास्ते का चौड़ीकरण अविलंब बरसात से पहले पहले ही मुकम्मल कर दिया जाये। भारतवर्ष में सबसे प्राचीन शैव‌ भक्तों का महातीर्थ श्री सदाशिव ध्यूंसर महादेवन तलमेहड़ा को माना जाता है। कहते हैं कि द्वापुर युग में पांडवों के राजपुरोहित धौम्य ऋषि जी ने स्वयंमेव भगवान श्री सदाशिव से इस धार्मिक स्थल को वरदान के तौर पर प्राप्त किया था।यह समूचे भारत के विभिन्न राज्यों के श्रद्धालुओं का भी आस्था गढ़ है। यही कारण है कि जिला ऊना के विभिन्न पांडवकालीन शिवालयों व शक्ति पीठों के कारण वर्तमान में इसे श्री छोटा हरिद्वार उपनाम से भी जाना जाने लगा है। पांडवकालीन शिवालयों व स्वर्ग में बहने वाली पौराणिक सोमभद्रा-स्वां नदी का जिला ऊना की धर्म संस्कृति में विशेष महत्व रहा है। श्री सदाशिव महादेवन की तरह गगरेट का पांडवकालीन द्रोणाचार्य शिव मंदिर भी इसी के समकक्ष माना जाता है। लोगों की धार्मिक अवधारणा पांडवकालीन गौरी गंगा महादेवन समीप लोहारा अम्बिकानगर-अम्ब श्री छोटा हरिद्वार से भी जुड़ी है। यहां स्थित गौर खड्ड को खीर गंगा नामकरण से भी विभूषित किया गया है। सारा साल ही इन
धार्मिक स्थलों पर भक्तों का आवागमन बना रहता है। श्रावण मास में यहां आने का विशेष महात्म माना जाता है। कालांतर में यह पांडवकालीन श्री सदाशिव ध्यूंसर महादेवन मंदिर को धार्मिक पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित करवाने की मांग उतरोतर बढ़ती जा रही है। जिला ऊना के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों ने जिला प्रशासन व हिमाचल प्रदेश सरकार से पुरजोर अपील पुनः दोहराई है कि प्राचीन पांडवकालीन श्री सदाशिव महादेवन मंदिर को धार्मिक पर्यटन स्थल बनवाने हेतु साकारात्मक पहल को अमली जामा पहनाया जाना चाहिए।
हालांकि श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु यह काबिले गौर है कि श्री सदाशिव महादेवन को गगरेट,अम्ब ,हरोली,बंगाणा, जिला ऊना मुख्यालय से कोई भी हिमाचल पथ परिवहन निगम की सीधी बस सेवा भी उपलब्ध नहीं है। धार्मिक श्रद्धालुओं को अपने निजी वाहनों पर ही श्री सदाशिव ध्यूंसर महादेवन मंदिर पंहुचना पड़ता है। इसी तरह श्री सदाशिव ध्यूंसर महादेवन के प्रवेशद्वार से मंदिर प्रांगण के डेढ़ किलोमीटर तक कोई भी वर्षा शालिका का प्रावधान उपलब्ध नहीं है। धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से विकसित करवाने एवं हिमाचल टूरिज्म का विश्राम गृह बनवाने से यहां पर्यटन को नये विकासोन्मुखी पंख लगवाये जा सकते हैं। यहां पर उपलब्ध सरकारी भूमि पर शापिंग काम्प्लेक्स का निर्माण करवाने से स्थानीय युवा बेरोजगारों को रोजगार भी उपलब्ध करवाने में , सफलता हासिल हो सकती है। छोटे दुकानदारों को भी अपनी आजीविका अर्जित करने में मदद मिलेगी। इसी तरह जिला ऊना के श्री छिन्न मस्तिकाधाम माता चिंतपूर्णी समेत शिवालयों को भी ट्राली परियोजना से जोड़ने की दरकार है। धार्मिक लोगों की आस्थाओं के अनुरूप अगर अम्ब उपमंडल के श्री माता चिंतपूर्णी व श्री बावा बड़भाग सिंह मैड़ी से श्री सदाशिव को टिंबर ट्राली परियोजना से जोड़ने से समूचे जिला ऊना के धार्मिक सांस्कृतिक पर्यटन की समग्र विकासवादी महाक्रांति का आगाज़ शुरू करवाया जा सकता है।
स्थानीय लोगों का तो यह भी मानना है कि तीन‌ सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूलों टकोली, तलमेहड़ा व अम्बेहड़ा में निकटतम उपलब्ध सरकारी भूमि पर हेलीपैड बना देने से यह स्थल बहुत ही सुविधा सम्पन्न बनवाया जा सकता है। विशेषतः राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय टकोली जो कि श्री सदाशिव महादेवन मंदिर से मात्र 9 किलोमीटर दूर स्थित है, टकोली वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय परिसर में उपलब्ध जमीन पर हैलीपेड का निर्माण करवाया जाता है तो श्री सदाशिव हिमाचल प्रदेश के मान चित्र पर अग्रणी धार्मिक पर्यटन स्थल के तौर पर हर हालत में सर्व प्रथम शिरोमणी बनेगा।
अतः जिला प्रशासन व हिमाचल प्रदेश सरकार को ‌ श्री पांडवकालीन ऐतिहासिक धरोहर को धार्मिक श्रद्धालुओं की गर्ज से तत्काल सुविधा सम्पन्न बनवाने हेतु प्राथमिकता के आधार पर रचनात्मक पहल की शुरुआत अवश्य ही करवानी चाहिए
राजीव शर्मन