ऊना जिला का श्री छोटा हरिद्वार अम्बिकानगर-अम्ब, मानवता कल्याणार्थ श्री सिद्ध चान्नों मंदिर
देवभूमि न्यूज डेस्क
ऊना
जिला ऊना का अम्ब उपमंडल तहसील मुख्यालय को कालांतर में इसके प्राचीन धार्मिक अस्तित्व के चलते श्री छोटा हरिद्वार अम्बिकानगर-अम्ब नगरी से भी जाना जाता है। यहां पर रियासत कालीन राजाओं ने राजपुर जसवां से आकर अपनी राजधानी एवं महल का निर्माण किया था। अम्ब के पौराणिक राजा रघुनाथ सिंह ने यहां पर विकासोन्मुखी कायाकल्प की इबारत ही नहीं लिखवाई बल्कि सैंकड़ों कनाल भूमि स्कूल के छात्र छात्राओं को दान देकर एक इतिहास रचा डाला था। श्री पांडवकालीन शिवालयों,श्री अम्बिका माता मंदिर व श्री कामाख्या देवी मंदिर भी पौराणिक ऐतिहासिक धरोहरों के प्रतीक हैं।
इसी तरह यहां पर बावा
श्री सिद्ध चान्नों का डेरा भी बहुत प्राचीन है। अम्ब उपमंडल तहसील मुख्यालय का यह मंदिर अम्ब-हमीरपुर रोड स्थित प्राचीन अम्बिका माता मंदिर से मात्र कुछ मीटर दूरी पर है।श्री सिद्ध चान्नों का मंदिर पीड़ित मानवता कल्याणार्थ एक बहुत बड़ी धार्मिक आस्था एवं अटूट श्रद्धा का केंद्र बन चुका है। यहां पर हर समय धार्मिक श्रद्धालुओं द्वारा अपने आध्यात्मिक,आधिभौतिक, आधिदैविक त्रय तापों की निवृत्ति का समाधान होता आया है।
मंदिर के प्रमुख सेवादार ईश्वर दास जी यहां पर सुवह-सांय आने वाले भक्तों की विभिन्न समस्याओं का निराकरण करवाने में तत्पर रहते हैं। लेखाकार के श्री सिद्ध चान्नों मंदिर में एक विशेष भेंट वार्ता के दौरान उन्होंने बताया कि यह धार्मिक स्थल अत्यंत प्राचीन है। पिछले सौ सालों के बुजुर्गो के समय यहां पर एक निशान साहिब हुआ करता था। ईश्वर दास ने कहा कि यहां पर हमने बुजुर्गों को धूप बत्ती करते देखा था। धीरे धीरे बावा श्री सिद्ध चान्नों ने अपने भक्तों को दृष्टांत देकर इस स्थल को विकसित करवाने की अगाध श्रद्धा से परिपूर्ण किया। कुछ दशकों से कड़ी मेहनत के चलते आज बावा श्री सिद्ध चान्नौं का भव्य मंदिर एवं विशाल धर्मशाला का निर्माण आकर्षण का केन्द्र बन गया है। श्री ईश्वर दास जी ने बतलाया कि हर शनिवार को यहां पर विभिन्न दूर-दराज क्षेत्रों से श्रद्धालु बावा श्री सिद्ध चान्नौं मंदिर में नतमस्तक होकर मनोवांछित फलों की प्राप्ति करते आये हैं। उन्होंने बताया कि वह बावा श्री सिद्ध चान्नौं की अपार कृपा से मामूली विभूति प्रसाद वितरण से श्रद्धालुओं को यथा शक्ति लाभ मिलता आया है।
पीड़ित मानवता कल्याणार्थ बावा श्री सिद्ध चान्नौं का मंदिर एक बहुत बड़ा शक्ति स्थल है।
सावन मास की समाप्ति पर भादों मास में श्री सिद्ध चान्नौं मंदिर में स्थित बावा का छत्र गाजे-बाजे के साथ साथ आम जनता जनार्दन के घरों में मेल मिलाप करने के लिए चल पड़ता है। ऐसे में भी श्रद्धालुओं की विभिन्न समस्याओं का निराकरण घर द्वार पर हो जाता है। श्री ईश्वर दास जी पिछले पचास सालों से लगातार बावा श्री सिद्ध चान्नौं के छत्र के साथ साथ विभिन्न घरों में विचरण कर श्रद्धालुओं की विभिन्न समस्याओं का देवत्व आज्ञा से निराकरण करवाते आये हैं।
ईश्वर दास ने बताया कि वैज्ञानिक और मशीनीकरण के चलते भावी पीढ़ी नशीले पदार्थों का उपयोग करने लगी है। उनको समाजिक समरसता की मुख्य धारा में वापस लाना एक परम ध्येय लेकर श्री सिद्ध चान्नौं मंदिर कमेटी सक्रीयता से विभिन्न धार्मिक,रचनात्मक, साकारात्मक कार्यों का संस्कारित कार्य करवाने हेतु पूरे मनोयोग से कार्य कर रही है।
उन्होंने बताया कि बावा श्री सिद्ध चान्नौं की एक दंगल प्रतियोगिता कमेटी भी बहुत पुरानी है तथापि इसका पुनर्गठन किया गया है।
श्री सिद्ध चान्नौं दंगल कमेटी विभिन्न मेलों के सुअवसरों पर कुश्तियों “छिंज मेला” का भी पूरे दम खम से आयोजन करवाती आई है। गौरतलब है कि अम्ब उपमंडल तहसील मुख्यालय में श्री सिद्ध बावा चान्नौं का छिंज मेला भी सुविख्यात है इन छिंजों में विभिन्न राज्यों के नामी-गिरामी पहलवान कुश्तियों के माध्यम से जनता जनार्दन का मनमोह लेते हैं।
श्री बावा सिद्ध चान्नौं मंदिर परिसर में वर्तमान में एक दूसरी मंजिल की धर्मशाला निर्माण करवाने का प्रस्तावित कार्यक्रम है।
उन्होंने बताया कि श्री सिद्ध चान्नौं बावा मंदिर की धर्मशाला की दूसरी मंजिल निर्माण से बाहर से आने वाले पहलवानों और श्रद्धालुओं के ठहरने की समुचित व्यवस्था हो जायेगी।
श्री ईश्वर दास जी ने नगर पंचायत अम्ब, स्थानीय उप मंडल अधिकारी नागरिक एस०डी०एम० अम्ब, स्थानीय विधायक चिंतपूर्णी और हिमाचल प्रदेश सरकार से पुरजोर आग्रह किया है कि श्री सिद्ध चान्नों मंदिर की धर्मशाला की दूसरी मंजिल जनहित में शीघ्रातिशीघ्र निर्माण करवाने में सभी अपना अपना योगदान देकर इस शक्ति स्थल को बहुविधि विकसित करवाने को शीघ्रातिशीघ्र जनहित में अमली जामा पहनाया जा सके।
*राजीव शर्मन*