ऊना-हमीरपुर-बिलासपुर की धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत का अभूतपूर्व आदान-प्रदान सुनिश्चित करवाता है :पिपलू मेला।
देवभूमि न्यूज डेस्क
ऊना
हिमाचल प्रदेश देवी-देवताओं की धार्मिक सांस्कृतिक आदान-प्रदान की स्वर्गिक भूमि है। यहां पर आये दिन समूचे हिमाचल प्रदेश में विभिन्न धार्मिक,सांस्कृतिक, पर्यटन आदान-प्रदान के मेलों उत्सवों का आयोजन पूर्ववत सफलतापूर्वक संपन्न करवाया जाता है।
इन उत्सवों में हिमाचली धर्म संस्कृति का वास्तविक रूप उजागर होता है। पहाड़ी लोक संस्कृति के यह मेलें हिमाचल प्रदेश के जनजीवन में सैंकड़ों सालों से सरस संचार करा आपसी सद्भाव और भाईचारे का संदेश गूंजायमान करते आ रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों में धार्मिक उत्सवों का आयोजन सदियों से किया जा रहा है। इसमें जिला मंडी का अंतराष्ट्रीय महाशिवरात्रि मेला,चम्बा का मिंजर, रामपुर शिमला का लवी मेला,सिरमौर का रेणूका झील मेला ,कांगड़ा का सुजानपुर होली मेला जगत प्रसिद्ध है।
इसी कड़ी में जिला ऊना की शिवालिक धौलाधार पर्वत श्रृंखला में रसे बसे प्राचीन कुटलैहड़ रियासत का श्री हरि सिंह नारायण पिपलू मेला भी पौराणिक काल से ही आयोजित किया जा रहा है। वर्तमान में इस पिपलू मेले को जिला स्तरीय मेले के रूप में भी आयोजित किया जाने लगा है। यह पिपलू मेला भगवान श्री हरि विष्णु के नरसिंह अवतार से संवन्धित है। जिला ऊना की बंगाणा तहसील एवं प्राचीन कुटलैहड़ रियासत की सोलह सिंगी धार के किलों की अनुपम छटा के प्रांगण में पिपलू मेला आयोजन धर्म संस्कृति की अभूतपूर्व छटा बिखेरता आया है। बंगाणा तहसील के पिपलू में एक पीपल ब्रह्म समीप भगवान श्री नरसिंह का प्राचीन मंदिर है। पुरातत्ववेत्ता इसे हजारों सालों से श्री विष्णु हरि भगवान के नरसिंह अवतार का प्रतीक मानते आये है। जिला ऊना में गत एक दशक से पिपलू मेला आयोजन ने धर्म संस्कृति का आदान-प्रदान सुनिश्चित करवाने की ओर समरसता एवं सफलता हासिल की है।
पिपलू मेला का जिला ऊना में बहुविधि विस्तार किया जाना चाहिए। तीन जिलों के साथ साथ जिला कांगड़ा का क्षेत्र भी ऊना की तहसील बंगाणा से सटा हुआ है, ऐसे में कांगड़ा तक भी पिपलू मेला अपने हर्षोल्लास की रंगत में रंगता आया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिपलू मेला को पशुओं की खरीद फरोख्त के नलवाड़ मेलों की तरह आयोजित करवाने से दुधारू पशुओं का व्यवसायिक मेला भी सफल सिद्ध हो सकता है। अतः सरकार को शीघ्रातिशीघ्र पिपलू मेला को राज्य स्तरीय उत्सव घोषित करके जनहित में इसका बहुआयामी विस्तार भी करवाना चाहिए।
इस बार पिपलू मेला दस जून से बारह जून तक बड़ी धूमधाम से आयोजित किया जा रहा है।
*राजीव शर्मन*