श्री मांडव्य ऋषि जनपद छोटी काशी जिला मंडी में राजा सिद्ध सेन ने 43 सालों तक राज किया और अनेकों मंदिर बनवाये।

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श्री मांडव्य ऋषि जनपद छोटी काशी जिला मंडी में राजा सिद्ध सेन ने 43 सालों तक राज
किया और अनेकों मंदिर बनवाये।

देवभूमि न्यूज डेस्क
ऊना

हिमाचल प्रदेश में सम्भवतः प्राचीन मांडव्य ऋषि नगर जनपद श्री छोटी काशी जिला मंडी मुख्यालय सबसे पौराणिक एवं ऐतिहासिक माना जाता है। बंगाल आये सेन वंशज राजा वाण सेन को मंडयाली रियासत का पहला राजा शासक माना जाता है। पंद्रहवीं शताब्दी में राजा अजवर सेन ने स्वयंम्भू बावा भूतनाथ जी का भव्य मंदिर बनवा व्यास नदी के उत्तर छोर की ओर एक नये श्री मांडव्य नगर की स्थापना की।
कालांतर में मंडी नगर निगम अस्तित्व में आ चुका है।
सन् ईस्वी 1727-1770 तक 43 सालों तक जबरदस्त एवं क्रुरता पूर्वक शासन किया। क्रूर शासक राजा सिद्ध सेन ने भंगाल -कांगड़ा से सटे राजा पृथी पाल जो कि रिश्ते में सिद्ध सेन का साला था।
राजा सिद्ध सेन भंगाल को अपनी रियासत में मिलाना चाहता था। इसके लिए उसने कई षड्यंत्र रचने के बावजूद असफल रहा था।
एक कूटनीतिक छल फरेब के तहत उसने पृथ्वीपाल को मंडयाली रियासत में आने का न्योता दिया कि सारे वैमनस्य गतिरोध भुलाकर अपने बहनोई से आकर मिले।
सत्यपथ पर आरुढ़ उदारवादी पृथ्वी पाल अपने बहनोई राजा सिद्ध सेन के झांसे में आ गया।
मांडव्य नगर जनपद में व्यास नदी पर जब नौका पार करने में सवार हुआ तभी राजा सिद्ध सेन के सैनिकों ने कैद करके बांध दिया।
राजा सिद्ध सेन ने पृथ्वीपाल को अंतिम बार पुछा कि अपने भंगाल को मेरी रियासत में मिलाने का प्रस्ताव मंजूर करता है अथवा नहीं?
स्वाभिमानी पृथ्वी पाल के मना करने पर राजा सिद्ध सेन आग बबूला हो गया और उसने अपनी तलवार से बंदी पृथ्वीपाल का सिर धड़ से अलग कर दिया। यही नहीं उसके दोनों बाजू और टांगें भी काट डाली। इससे पहले की सिद्ध सेन की पत्नी रानी को अपने भाई की निर्मम हत्या का समाचार मिलता राजा ने पोखर नुमा खाली मैदान जहां पर वर्तमान में इंदिरा मार्केट काम्प्लेक्स बना है वहां दफ़न करा दिया। मैदान के मध्य सिर विक्षत शव और चारों कोनों में बाजुओं और लातों का दफ़न कर दिया। रानी तक समाचार पहुंच ही गया और हाहाकार मच गया। रानी ने भाई पृथ्वी पाल की हत्या पर विलाप करते हुए राजा को फटकारते हुए कई शाप दिए जिनमें “मंडी कोलसरा,हरामखोर की परौल” आज भी ऐतिहासिक बना हुआ है।
कहते हैं कि भाई पृथ्वी पाल की हत्या के कुछ महीनों उपरान्त रानी भी चल बसी थी। मरते मरते। रानी कुपित होकर राजा सिद्ध सेन को भाई पृथ्वी पाल की हत्या पर फटकारते हुए शाप देती गई थी।
राजा सिद्ध सेन इसके बाद अपना चैन सुख खो बैठा था। पृथ्वी पाल की प्रेतात्मा राजा सिद्ध सेन को विस्तर से पटक देती थी। राजा ने विद्वान पुरोहितों की राय मांगी थी। बंगाल के पंडितों व आचार्यों ने राजा सिद्ध सेन को प्रायश्चित करने का सुझाव दिया था। सबसे पहले श्री सिद्ध गणपति मंदिर को वर्तमान अस्पताल रोड में आदम कद भारी भरकम प्रतिमा को गणधव्वा गंधेरू जंगल पर्वत की चट्टान पर उकेरा गया था। कहते हैं कि सिद्ध सेन बैठे बैठे इस सिद्ध गणपति को तिलक लगा लेता था। उसके बाद व्यास दरिया के आर पार सिद्ध जाल्पा देवी और सिद्ध भद्रा माता को साकार करने, समस्या निवारण का सालों साल कोई लाभ राजा सिद्ध सेन को नहीं मिल पाया था। ऐसे में जहां पृथ्वी पाल को दफन किया गया था। वहां पर आत्मिक शांति हेतु सरोवर का निर्माण करवाया गया था। बहुत सालों तक राजा सिद्ध सेन यहां पर स्वयं दीप-दान
करता रहा था। रानी के कुपित होने व पृथ्वी पाल यहां पर शिखर दोपहर बारह बजे दिन- रात्रि लोगों को ग्रस लेता अथवा छाया पड़ जाती थी। इनमें विशेषतः गर्भवती महिलाओं और बच्चों पर ज्यादा कोप होता था।
राजा सिद्ध सेन को बंगाल के पुरोहितों ने श्री सिद्ध काली, सिद्ध शिव शंकर शम्भू और भैंरों की उपासना व मंदिरों को साकार करने का परामर्श दिया था।
इस तरह से प्रचंड सिद्ध काली की उग्र प्रतिमा को उकेरा गया व सिद्ध किया गया। वर्तमान में श्री सिद्ध काली सैंकड़ों सालों से नये इंदिरा मार्केट काम्प्लेक्स में भव्य मंदिर में विराजमान रहती हैं। आज भी श्री सिद्ध काली की प्रचंड प्रतिमा से आंखों को मिलाना वर्जित माना जाता है। इस सिद्ध काली मंदिर में सालों साल विद्वान उपाधा पंडित विद्नू प्रसाद चारों पहरों की काली पूजा करते रहें हैं।तदुपरांत उनके कुशल सुपुत्र दुर्गा प्रसाद जी सालों साल श्री सिद्ध काली माता जी की उपासना व पूजा करते रहें हैं।
वर्तमान में उनके वंशज पंडित जगदीश उपाधा श्री सिद्ध काली माता जी की सेवा में लगे रहते हैं।

इस तरह से श्री मांडव्य ऋषि नगर जनपद में श्री सिद्ध काली माता जी आज भी सारे प्रेतात्मा और अरिष्टकारी शक्तियों से अपने भक्तों को सदैव बचाती आई है।
जिला मंडी मुख्यालय में आने वाले धार्मिक श्रद्धालुओं और पर्यटकों द्वारा श्री सिद्ध काली माता जी के भव्य मंदिर में उनके प्रचंड दर्शन अवश्य किए जाते हैं।

राजीव शर्मन्