जिला मंडी के व्यास नदी-सुकेती खड्ड संगम की ऐतिहासिक चक्कढ़ीनी चट्टान
देवभूमि न्यूज डेस्क
मंडी
यह है श्री मांडव्य नगर छोटी काशी जिला मंडी की प्राचीन , ऐतिहासिक विरासत एवं रहस्यमयी चक्कढ़ीनी चट्टान। कुदरत की रची अनूठी शिल्प कृति। चट्टान के ऊपरी सिरे तक पहुंचने के लिए आरामदेह पौड़ियां बनी हुई हैं, इसका कोई प्रमाण नहीं मिलता है
कि किसने और कब यह बनाई है?कहीं पर भी इसका लिखित विवरण अथवा उल्लेख नहीं मिलता है। हालांकि व्यास ऋषि की प्राचीन मांडव्य शिला सन्निकट व्यास नदी और सुकेती संगम के बीचों-बीच तट पर बने प्राचीन पंचवक्त्र मंदिर और इसके ठीक सामने श्री त्रिलोकीनाथ मंदिर राष्ट्रीय स्मारक घोषित हो चुके हैं। इसके पास में ही करीब तीस साल पुरानी खानाबदोश बस्ती को यहां से हटाए जाने के बाद से पंचवक्त्र धाम और चक्कढ़ीनी चट्टान सैलानियों के साथ ही आम लोगों की पसंदीदा सैरगाह के रूप में उभरे हैं। चक्कढ़ीनी चट्टान तो युवाओं के लिए फोटो शूट का फेवरेट प्वांइट बन चुका है। अगर आप भी कुछ सुकून के लम्हें यहां व्यतीत करना चाहते हैं तो चक्कढ़ीनी चट्टान समय व्यतीत कर सकते हैं लेकिन सावधान ब्यास नदी और सुकेती खड्ड बरसात में रौद्र रूप दिखाती आई हैं। अतः शैल्फी शौकीन व यहां जाने वालों को चेतावनी दी जाती है कि आजकल बरसात में यहां बिल्कुल भी ना जायें। पिछले साल भी बरसात के भीषण बाढ़ के दिनों में यह चक्कढ़ीनी चट्टान भारी बाढ़ के चलते पूर्णतः पानी में जलमग्न हो गई थी।
अतः आजकल व्यास नदी समीप चक्कढ़ीनी चट्टान पर जाने की बिल्कुल भी हिमाकत नहीं की जानी चाहिए।
-राजीव शर्मन्