हिमाचल प्रदेश में गणेशोत्सव आयोजन को सरकारी मेला घोषित करना चाहिए।-राजीव शर्मन्
देवभूमि न्यूज डेस्क
ऊना
हिमाचल प्रदेश सार्वजनिक गणेशोत्सव आयोजन के संस्थापक एवं संचालक राजीव शर्मन् ने हिमाचल प्रदेश सरकार से पुरजोर आग्रह किया है कि अस्सी के दशक से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में मनाये जाने वाले श्री गणेशोत्सव को सरकारी मेला घोषित कर देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि धार्मिक सांस्कृतिक आदान-प्रदान की इस स्वस्थ परम्परा का संवर्धन करने हेतु गणेशोत्सव का सरकारी संरक्षण प्रासांगिकता लिए हुए है।

इससे समूचे प्रदेश में धर्म संस्कृति कला का उत्कृष्ट समागम देखने को मिलेगा। सार्वजनिक गणेशोत्सव को सरकारी मेला घोषित करने से विभिन्न जिलों में मनाये जाने वाले उत्सव के गणेश मंडलों में भी एकात्मकता का संचार हो जायेगा। राजीव शर्मन् ने यह भी अपील की है कि पर्यावरण संरक्षण हेतु भी भारी भरकम गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन भी पर्यावरण प्रदूषण का बड़े पैमाने पर कारण बनता जा रहा है। जब विभिन्न स्थानों पर सरकारी तौर पर गणेशोत्सव का आयोजन होगा तो निश्चित तौर पर ज्यादा पैमाने पर विसर्जित की जाने वाली गणेश प्रतिमाओं में सुधारवादी न्यूनता स्वयंमेव आ जायेगी। राजीव शर्मन् ने गणेशोत्सव पर्व पर पर्यावरणीय संरक्षण को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया है।

महापर्व श्री कृष्णाष्टमी इस बार 18 अगस्त उपरान्त समूचे हिमाचल प्रदेश में भारत के आदि देवता अग्रपूज्य श्री गणेश के जन्मोत्सव श्री गणेशोत्सव की ज़ोरदार तैयारियां शुरू होने वाली है। गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में सर्वप्रथम जिला मंडी तदुपरांत जिला ऊना दोनों जिलों में सार्वजनिक गणेशोत्सव आयोजन की शुरुआत राजीव शर्मन् द्वारा ही की गई है। राजीव शर्मन् को सर्वप्रथम हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक गणेशोत्सव स्थापित करने का पूरा श्रेय प्राप्त हुआ है। आजकल जिला ऊना में सार्वजनिक श्री गणेशोत्सव मनाने की ज़ोरदार तैयारियां चल रही है।

इसके साथ-साथ ही समूचे जिला ऊना में”कुश्तियों का महामेला”के पँडाल भी सजने लगे है।काबिलेगौर है कि जिला ऊना का गणपति-उत्सव और कुश्तियों का महामेला सुप्रसिद्ध है।इसी के चलते जिला ऊना की सभी तहसीलों में तैयारियाँ अन्तिम चरण में है।ऊना जनपद के लोगों को सार्वजनिक गणेशोत्सव के सरकारी मेला घोषित होने का भी इन्तजार है ताकि “श्री गणेशोत्सव” और “कुश्तियों का महामेला” सही सामंजस्य बिठा सके। श्री गणेश जी भारतीय सनातन-संस्कृति के आदि देवता हैं। इनका सर्वप्रथम पूजन किया जाता है। अठारह पुराणों,छह उपनिषद् व चारों वेदानुसार श्री गणेश अग्र पूज्य है। सभी देवी देवताओं में श्री गणेश का प्रारम्भिक पूजन करने की मान्यता चिरकाल से चली आ रही है। श्री सदाशिव भगवान शंकर और पार्वती के पुत्र इस भूमंडलीकरण के चौदह लोक व तीन भुवनों के स्वामी हैं। सृष्टि के तीनों देव ब्रह्मा,विष्णु व महादेव जी भी इनका पूजन,अर्चन तथा नित्यप्रति वंदन किया करते हैं। सभी भारतवासी जानते हैं कि आजादी की लड़ाई में लोकमान्य बाल गंगाधर जी तिलक ने सन् ईस्वी 1893 में पूणे महाराष्ट्र में भारतीय जनमानस को जागृत करने हेतु आदि देवता श्री गणेश का उद्घोष लगाया। गणपति के प्राकट्य दिवस यानि इनके जन्मोत्सव भादों मास शुक्ल श्री गणेश चतुर्थी पर “श्री गणेशोत्सव” को सार्वजनिक उत्सव मनाने की परम्परा डाली गई। अनन्त चतुर्दशी तक दस दिनों की पूजा उपरांत श्री गणेश प्रतिमा विसर्जन की विशुद्ध सनातन संस्कृति आज भी अनवरत जारी है। इतिहास साक्षी है कि “श्री गणेशोत्सव” के सार्वजनिक आयोजन ने भारत की आजादी में नई चेतना का सूत्रपात करवाया। सारा भारत आज भी तिलक द्वारा स्थापित सार्वजनिक गणेशोत्सव को राष्ट्रीय सांस्कृतिक एकात्मकता का उत्सव मान कर हर साल ही इस महापर्व को मनाता आ रहा है। राष्ट्रीय गणेशोत्सव अपनी स्थापना की 129वीं वर्षगांठ मना रहा है।हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक गणेशोत्सव की शुरूआत जिला मंडी शहर के श्री सिद्ध गणपति मंदिर में सन् ईस्वी 1989 में की गई। मंडी कुल्लू घाटी के श्री देव बड़ा छःमाहुं ने हजारो देवलुओं के साथ सार्वजनिक गणेशोत्सव की स्थापना करवाई जो क्रम आज भी सिल्वर जुबली मनाने उपरांत भी चला आ रहा है। जिला ऊना-हिमाचल में सार्वजनिक “श्री गणेशोत्सव” का श्री गणेश चौकीमन्यार से 2007 में किया गया तदुपरान्त अम्ब तहसील उपमंडल में यह आयोजन हर साल ही बड़ी श्रद्धा व उल्लास से “श्री अम्बिकानगर-अम्ब गणेशोत्सव” भी मनाया जाता है। दस दिनों तक सार्वजनिक श्री गणेशोत्सव पूजा को सोमभद्रा-स्वां नदी में विसर्जित किया जाता है।हर साल की तरह इस साल भी सार्वजनिक गणपति-उत्सव 31अगस्त से 9 सितम्बर तक बड़ी ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। आजकल अगस्त-सितम्बर मास के दस्तक देते ही गणेश मूर्तियाँ बनाने का कार्य पुरजोरों पर है। आओ!हम सार्वजनिक गणेशोत्सव के माध्यम से राष्ट्रीय सांस्कृतिक एकात्मकता मजबूत करवाएँ और आने वाली भावी पीढ़ी का मार्ग प्रशस्त बनाकर सभी प्रकार की विषमताओं का निराकरण सुनिश्चित करायें।

अतः इस बार सार्वजनिक गणेशोत्सव आयोजन संचालन के प्रणेता राजीव शर्मन् ने हिमाचल प्रदेश सरकार से विनम्र आग्रह किया है कि धर्म संस्कृति का आदान-प्रदान सुनिश्चित करवाने की गर्ज से गणेशोत्सव का सरकारी तौर पर आयोजन करवाया जाये ताकि इससे धर्म संस्कृति कला को भी समुचित बढ़ावा मिल सके। तथापि सार्वजनिक गणेशोत्सव के दौरान मूर्ति पूजा विसर्जन पर भी उन्होंने पारदर्शिता अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया है ताकि नदियों का पर्यावरणीय संरक्षण भी किया जा सके।