जिला मंडी मुख्यालय में प्राचीन श्री मांडव्य ऋषि का भव्य मंदिर निर्माण करवाया जाना चाहिए।

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जिला मंडी मुख्यालय में प्राचीन श्री मांडव्य ऋषि का भव्य मंदिर निर्माण करवाया जाना चाहिए।

देवभूमि न्यूज डेस्क
मंडी

हिमाचल प्रदेश का वर्तमान जिला मंडी एक पौराणिक, धार्मिक, ऐतिहासिक विरासत का रियासती नगर रहा है।
इसे श्री मांडव्य ऋषि नगर जनपद श्री छोटी काशी के नाम से समूचे हिमाचल प्रदेश के साथ साथ भारत के मानचित्र पर देखा जा सकता है। जिला मंडी शहर की समृद्ध धार्मिक सांस्कृतिक पर्यटन विरासत के आदान-प्रदान का प्रतीक यहां हर साल मनाये जाने वाले अंतराष्ट्रीय महाशिवरात्रि पर्व से सहज सुनिश्चित किया जा सकता है। प्राचीन श्री मांडव्य नगर छोटी काशी जिला मंडी मुख्यालय में हजारों सालों से बहती आ रही व्यास गंगा की पावन धारा जिसका पौराणिक नाम विपाशा नदी का उल्लेख मिलता है। हजारों साल पुराने रियासती नगर मंडी में देवी-देवताओं के भव्य मंदिर स्थित है जिनमें श्री सिद्ध गणपति,श्री स्वयंम्भू बावा भूतनाथ जी,श्री पंचवक्त्र महादेव,श्री अर्द्ध नारीश्वर,श्री त्रिलोकीनाथ भगवान,श्री टारना माता जी श्यामा काली अत्यंत प्रसिद्ध है। व्यास नदी के दोनों घाटों के मुहानों के साथ साथ यहां पर श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का ऐतिहासिक गुरुद्वारा भी श्री मांडव्य शिला के समीप मंडी -कुल्लू-मनाली मुख्य सड़क मार्ग पर स्थित है। वर्तमान परिपेक्ष्य में कांगड़ी हैलीपैड और बल्ह हवाई अड्डे के निर्माण से तो मंडी एक बहुत बड़े अत्याधुनिक विस्तारवादी नये मांडव्य नगर से भारत के मानचित्र पर सुशोभित होने लगा है।

मंडी जिला मुख्यालय को पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से सजाने हेतु ‌श्री मांडव्य ऋषि झील,श्री मांडव्य ऋषि मंदिर और विभिन्न ट्राली परियोजना के साथ साथ अंतराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम साकार करने की भी लम्बी फेहरिस्त सामने आती रही है।
इसमें मंडी को धार्मिक सांस्कृतिक पर्यटन स्थल की रमणीयता बढ़ाने हेतु नया नामकरण मांडव्य नगर की भी मांग बहुत पुरानी है।
नये प्रस्तावित अत्याधुनिक सुविधा सम्पन्न मांडव्य नगर को साकार करना अवशयम्भावी बनता जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से व्यास नदी के दोनों घाटों का जीर्णोद्धार समय की मूलभूत आवश्यकताओं में सम्मिलित हैं। इसमें व्यास नदी के नये पुल समीप श्री डुग्गलेश्वर महादेव घाट सर्वप्रथम जीर्णोद्धार के लिए प्रमुख है।
जिला प्रशासन एवं मंडी नगर निगम को डुग्गलेश्वर महादेव घाट का जीर्णोद्धार और प्राचीन मांडव्य ऋषि का भव्य मंदिर निर्माण की बहुत बार आम जनता जनार्दन ने गुहार लगाई है।

लोगों का कहना है कि जिला मंडी शहर प्राचीन मांडव्य ऋषि नगर जनपद है तथापि यहां पर मांडव्य ऋषि का भव्य मंदिर और उनकी पावन मूर्ति की स्थापना करा मंडी शहर का प्राचीन गौरव बहाल किया जाना चाहिए।
आम जनता की राय में डुग्गलेश्वर महादेव घाट व्यास नदी तट का सबसे प्राचीन घाट है तथापि इसका कायाकल्प करवाना हम सभी का दायित्व बनता है।
मंडी गजेटियर और हिस्ट्री ऑफ मंडी द्वारा मनमोहन सिंह द्वारा इसका प्राचीन श्री मांडव्य ऋषि शिला का भी वर्णन किया गया है।
सम्भवतः प्राचीन मांडव्य ऋषि के नाम पर ही सेन वंशज रियासती राजाओं ने श्री मांडव्य ऋषि नगर जनपद को बसाया था। कालांतर में व्यापारिक मंडी का गढ़ होने से मंडी नामकरण अस्तित्व में सुप्रचारित हो गया।
मंडी की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में कहीं ना कहीं सतयुग के महान ऋषि की तपोभूमि प्राचीन श्री मांडव्य ऋषि नगर जनपद रही है। ऐसा सभी प्रबुद्ध वर्ग और इतिहासकारों ने उल्लेख किया है।
प्राचीन श्री मांडव्य ऋषि नगर जनपद का नाम विभिन्न प्राचीन पुस्तकों में किया गया है।सनातन संस्कृति और कर्म काण्ड की पुस्तकों में भी श्री मांडव्य ऋषि नगर जनपद जिनमें पंडित भालचंद्र जी की पुस्तक में स्पष्ट प्रमाण मिलता है। नये मांडव्य नगर का प्रचार प्रसार बहुत पुराना है

अतः वर्तमान में भी जनकांक्षाओं और जन भावनाओं के अनुकूल वर्तमान मंडी नगर निगम में व्यास नदी समीप श्री डुग्गलेश्वर महादेव घाट में ही श्री मांडव्य ऋषि का भव्य मंदिर निर्माण और उनकी भव्य मूर्ति की स्थापना अवश्य ही की जानी चाहिए।
प्राचीन मांडव्य ऋषि जनपद का गौरव बहाल करवाने की मांग दोहराते हुए आम जनता जनार्दन ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर जी से भी विनम्र पुरजोर आग्रह किया है कि मंडी जिला मुख्यालय में ‌श्री मांडव्य ऋषि का भव्य मंदिर निर्माण और उनकी पावन मूर्ति को स्थापित करने की सभी संभावनाओं को तलाशने की हर हाल में कोशिश की जानी चाहिए। इसी के साथ साथ मंडी नगर का राजस्व विस्तारीकरण से नया नामकरण मांडव्य ऋषि नगर को भी सरकारी मान्यता दिलवाने की पुरजोर मांग भी दोहराई गई है।
वर्तमान परिपेक्ष्य में धार्मिक नगरी छोटी काशी जिला मंडी को ‌श्री मांडव्य नगर नामकरण की स्वीकृति दिलाना सम-सामयिक एवं प्रासांगिकता लिए हुए है।
मंडी को मांडव्य नगर की मान्यता/अधिसूचना भी सरकार द्वारा जनहित में अवश्यंभावी नामांकित की जानी चाहिए।
*राजीव शर्मन*