उत्तर भारत की सबसे विशालकाय श्री सिद्ध गणपति प्रतिमा

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उत्तर भारत की सबसे विशालकाय श्री सिद्ध गणपति प्रतिमा

देवभूमि न्यूज डेस्क
मंडी

श्री मांडव्य नगर ऋषि नगर जनपद छोटी काशी जिला मंडी शहर में उत्तर भारत की सबसे विशालकाय श्री सिद्ध गणपति प्रतिमा साक्षात दर्शनीय एवं विराजमान हैं। यह विशालकाय ऐतिहासिक श्री सिद्ध गणपति मंदिर हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी शहर में प्राचीन गंधर्व पर्वत (गणधब्बा-गंधेरु जंगल) पश्चिमोत्तर जिला अस्पताल रोड स्थित है। इस पौराणिक सिद्ध गणपति प्रतिमा का प्राकाट्य राजा सिद्ध सेन ने सन् ईस्वी 1731 में अपने शासनकाल 1727-1770 के दौरान करवाया था। कहते हैं कि इसे पर्वत से सटी पहाड़ी पर ही उकेर कर निर्मित करवाया गया था। जिस कारीगर ने इस गणपति प्रतिमा की कलाकृति की थी, उसने राजा सिद्ध सेन के आदमकद को ध्यान में रखते हुए इसे साकार किया था।

पौराणिक श्री मांडव्य ऋषि नगर जनपद के बुजुर्ग लोगों के मतानुसार राजा सिद्ध सेन इस सिद्ध गणपति जी को बैठे बैठे तिलक लगा सकते थें। राजा सिद्ध सेन स्वयं एक तांत्रिक राजा थे। अतः श्री सिद्ध गणपति को सिद्धिदात्री साधना हेतु आज भी फलदाई माना जाता है।
विजय हाई स्कूल के तत्कालीन श्री ओमदत्त शास्त्री जी ने यहां बतौर पुजारी पूजा अर्चना जारी रखी थी। वर्तमान में इस स्थल पर पंडित जयराज लाला जी पूजन अर्चन जारी रखें हुए हैं।
कालांतर में इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाने हेतु इस फीचर के लेखाकार ने स्वयं अस्सी के दशक में यहां पर गणपति सेवा समिति का गठन कर सार्वजनिक गणेशोत्सव की परम्परा सूत्रपात आगे बढ़ाया था।
वर्तमान में श्री सिद्ध गणपति ट्रस्ट अस्तित्त्व में कार्यशील है।

सिद्धियों के लिए मशहूर हैं सिद्ध गणपति धाम
यहीं से समूचे हिमाचल की धर्म संस्कृति की परंपरा बना गणपति उत्सव।
इस बार भी हर साल की तरह 31 अगस्त से 9 सितंबर 2022 तक श्री मांडव्य नगर छोटी काशी जिला मंडी में सार्वजनिक गणेशोत्सव मनाने की विभिन्न गणेश मंडलों द्वारा जोरदार तैयारियां शुरू हो गई है।
महातपस्वी ऋषि व्यास की जटाओं से निकली पावन विपाशा व्यास नदी में गणपति पूजा अर्चना विसर्जन सारे श्री मांडव्य नगर को राष्ट्रीय धार्मिक सांस्कृतिक एकात्मकता के रंग में गणपतिमय भक्ति से सराबोर बना देता है।

वक्रतुंड, एकदंत, कृष्ण पिंगाक्षं,गजवक्तर,लंबोदर, विकटमेव,विघ्नराजेन्द्र, धूम्रवर्ण ,भालचंद्र,सिद्धी विनायक,सिद्ध महागणपति, गजानन, गणेश •••ऋद्धी-सिद्धी के स्वामी मंगलकारी गणपति के अनेकों नाम हैं ••• बस सुमिरन करते जाईए। श्री मांडव्य नगरी के प्राचीन देवालयों में सिद्ध गणपति मंदिर इसलिए भी प्रमुख है, क्योंकि इनके दर्शन का सौभाग्य मिलने पर ही छोटी काशी की परिक्रमा पूर्ण मानी जाएगी। भीमकाय काया रखने वाले सिद्ध गणपति को बड़े अदब से छोटी काशी का महाराज कहा जाता है। मंदिर का निर्माण सोलहवीं- सत्रहवीं शताब्दी के दौरान हुआ बताया जाता है। श्री मांडव्य ऋषि जनपद मंडी रियासत के इतिहास में उसके सबसे शक्तिशाली राजा सिद्ध सेन ने यह मंदिर बनवाया तो महाराज सिद्ध गणपति हो गए। तत्कालीन राजा सिद्ध सेन की तंत्र साधना से यह मंदिर दूर दूर तक मशहूर हो गया। सिद्धियां पाने के लिए आज भी यहां उचिष्ट, संग्राम विजेता सिद्धिविनायक और हेरम्ब गणपति की साधना होती है।
छोटी काशी में तंत्र साधना के दो ही देवालय हैं। एक अघोर साधना का केंद्र पंचवक्त्र महादेव तो दूसरा सिद्ध गणपति मंदिर। दोनों ही प्राचीन मंदिर पुरातत्व महत्व के हैं। पंचवक्त्र महादेव विशाल मंदिर है, पर सिद्ध गणपति मंदिर अपेक्षाकृत छोटा रहने पर भी इसमें विराजमान विशालकाय गणपति महाराज की ख्याति दूर दूर तक फैली हुई है।यह अवधारणा रियासती काल से ही चली आ रही है कि राजा हो या रंक, यहां सांचे दरबार में सबके मनोरथ सिद्ध होते हैं। विशाल चट्टान को काटकर गणपति प्रतिमा का भव्य शिल्प गढ़़ा गया है। सिद्ध गणपति महाराज के भीमकाय स्वरूप के अनुरूप ही काफी बड़ा मूषक उनकी सवारी के लिए यहां शोभायमान है। करीब तीन दशक पहले हिमाचल के संदर्भ में सबसे पहले छोटी काशी के इसी देवालय से गणपति उत्सव की शुरुआत हुई तो अब यह इस पहाड़ी प्रदेश की समृद्ध परंपरा बन चुका है। प्रथम गणेशोत्सव में कुल्लू घाटी के श्री देव बड़ा छमाहुं शेषनाग ने हजारों देवलुओं के साथ 1989 में सार्वजनिक धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन का आदान-प्रदान सुनिश्चित करवाया था।

राजीव शर्मन