श्रावण मास महोत्सव की शिवरात्रि पर्व पर सजा श्री गौरी गंगा महादेवन मंदिर
देवभूमि न्यूज डेस्क
ऊना
जिला ऊना का पांडवकालीन महातीर्थ श्री छोटा हरिद्वार श्री गौरी गंगा महादेवन श्रावण मास महोत्सव में शिवमयी भक्ति में लीन हो गया है। आज श्रावण शिवरात्रि पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
प्राचीन पांडवकालीन महातीर्थ श्री गौरी गंगा महादेवन परिसर को धार्मिक पर्यटन स्थल विकसित करवाने की मांग दोहराई।
चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्र के प्राचीन पांडवकालीन शिवालय श्री गौरी गंगा महादेवन परिसर को धार्मिक पर्यटन स्थल बनवाने की एक दशक पुरानी मांग को आम जनता-जनार्दन ने पुनः दोहराया है। लोहारा,जिज्जर,भगड़ाह,चौआर,मथैहड़ पंचायत के ग्रामीणों रामदास,अरूण कुमार, राजीव कुमार,रामलोक शर्मा, मुकेश ठाकुर, मन्जीत जसवाल,अजय कुमार, भुवनेश कुमार, नितिन शर्मा, रजनीश शास्त्री आदि ने धार्मिक श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु श्री गौरी गंगा महादेवन उपनाम श्री छोटा हरिद्वार में सुविधाओं को मुहैय्या करवाने की सरकार से पुरानी मांग पुनः दोहराई है। इलाका वासियों ने श्री गौरी गंगा महादेवन परिसर का संरक्षण और जीर्णोद्धार करा इसे धार्मिक पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित करवाने की अपील की है। प्राचीन गौर खड्ड जिसे श्री खीर गंगा के नाम से भी जाना जाता है के मुहाने पर बसे श्री गौरी गंगा महादेवन परिसर का विस्तार किया जाना समय की पुकार है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन ऊना से भी आग्रह किया है कि प्राथमिकता के आधार पर शीघ्रातिशीघ्र इस धार्मिक स्थल का विस्तार करवाया जाना चाहिए।
जिला ऊना की अम्ब तहसील का पांडवकालीन श्री गौरी गंगा महादेवन धार्मिक श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।

चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्र जहां श्री छिन्न मस्तिकाधाम माता श्री चिंतपूर्णी जी का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। वहीं पर अम्ब उपमंडल से मात्र 8 कि०मी० व अम्ब-चिंतपूर्णी मुख्य मार्ग कलरूही से 10 किलोमीटर दूर चीड़ के घने जंगलों में गौर-खड्ड के सन्निकट श्री पांडवकालीन शिवालय स्थित है। यहां प्राचीन गुफा भी है, जहां पर सम्भवतः तपस्वी साधू महात्माओं ने इसे अपनी तप स्थली बनाया है। आजकल वर्तमान में श्री गौरी गंगा महादेवन जिसे श्री छोटा हरिद्वार उपनाम से भी पुकारा जाता है। यहां एक फकीर साधू श्री गुरशरण सिंह जी मंदिर की व्यवस्था संभालने का कार्य बखूबी कर रहे हैं। श्री गौरी गंगा को माता पार्वती का श्री गौर खड्ड में पावन स्नान करने आने की भी धार्मिक मान्यता है। यहां पर निर्जन स्थान और श्मशान महाकाल क्षेत्र होने से दिन को भी अकेले में भय सताने लगता है। धार्मिक श्रद्धालुओं की आस्था इस शिवालय से जुड़ी है। मंदिर परिसर में नन्दी बैल का दर्शन करने से मालुम होता है कि यह प्राचीन शिवालय है तथापि गौरी गंगा महादेवन शिवलिंग पर पंचामृत अभिषेक स्नान करवाना श्री काशी विश्वनाथ जी के पावन शिवलिंग के पुन्य तुल्य ही माना जाता है। यहां पर बहुत दूर दूर से धार्मिक श्रद्धालु भगवान शिव-पार्वती (श्री गोरी-गंगा महादेवन जी) की अलौकिक कृपा का शुभ आशीर्वाद पाकर अपने को कृत कृत गौरवान्वित महसूस करते हैं। श्री छोटा हरिद्वार उपनाम के पीछे लोक किंवदंतियों अनुसार यहां पर हरिद्वार की स्थापना होनी थी किसी अपरिहार्य रुकावटों के चलते यहां श्री गंगा जी अवतरित नहीं हो पाई थी। श्री पांडवकालीन प्राचीन गौर खड्ड को ही खीर गंगा का नामकरण किया गया है। यहां संसारिक त्रय तापों के छुटकारे हेतु साल भर श्रद्धालुओं द्वारा श्री महामृत्युंजय पाठ हवन आयोजित किए जाते हैं। शिवरात्रि पर्व पर यहां विशेष रूप से श्रद्धालुओं का अम्बार लगता है। हर साल श्रावण मास में महीना भर श्रद्धालुओं का यहां तांता लगा रहता है। लोगों की अगाध एवं अटूट आस्था है कि जिन कन्याओं की शादी में रुकावट, निसंतान दम्पत्ति विशेष तौर पर यहां अनुष्ठान करा मनोवांछित अभिलाषा की पूर्ति कर लेते हैं। दुर्घटनाओं से बचाव हेतु यहां नये बाहनो पर श्री गौरी गंगा महादेवन शिवलिंग की जलैहरी के पावन जल का छिड़काव किया जाता है।

वर्तमान में इस धार्मिक स्थल को श्रद्धालुओं की सुविधा उपलब्ध कराने हेतु विकसित करवाने की आवश्यकता है। सर्वप्रथम श्री गौरी गंगा महादेवन जी की गौर खड्ड की ओर से चारदीवारी करने की प्रथमिकता है। चारदीवारी से यह स्थल सुरक्षित एवं रमणीय स्थल के तौर पर विकसित हो जायेगा। श्री चन्नी देवी व लोहारा मुख्य सड़क से श्री गौरी-गंगा महादेवन मंदिर के लगभग पांच सौ मीटर रास्ते को भी तत्काल पक्का करा अत्याधुनिक रूप से टाइलों से सुसज्जित करा भव्य आकर्षण का केंद्र बनवाना चाहिए। धार्मिक श्रद्धालुओं के लिए यहां श्री गौरी गंगा महादेवन जी परिसर में पार्किंग की भी समुचित व्यवस्था उपलब्ध करवाने की जोरदार मांग है ताकि मंदिर में आने वाले धार्मिक पर्यटकों को कोई असुविधा ना हो। जिला ऊना का भाषा एवं संस्कृति विभाग प्राचीन पांडवकालीन श्री गौरी गंगा महादेवन को विकसित करा इसे धार्मिक पर्यटन व सांस्कृतिक केंद्र व शिवरात्रि मेले के आयोजन के लिए भी तथा सम्भव विकसित करा सकता है।

श्री गौरी गंगा महादेवन जी में एक धार्मिक सराय की भी नितान्त आवश्यकता है ताकि मंदिर में आने वाले दूरदराज के श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की दुविधा ना हो। जल भंडारण की भी मूलभूत आवश्यकता है। यहां पर आयोजित होने वाले शिवरात्रि पर्व को पंचायत स्तर पर ग्राम पंचायत चौआर और ग्राम पंचायत भगड़ाह के संरक्षण से स्थानीय पंचायत स्तर का शिवरात्रि मेला भी आयोजित किया जा सकता है। श्री गौरी गंगा महादेवन परिसर में उपलब्ध सराय में ग्रामीण क्षेत्र पुस्तकालय व उप-स्वास्थ केन्द्र की सुविधा भी धार्मिक श्रद्धालुओं और स्थानीय ग्रामीणों को उपलब्ध कराई जा सकती है। अतः जिला प्रशासन ऊना, स्थानीय उपमंडल अधिकारी अम्ब और संवन्धित पंचायतों को श्री गौरी गंगा महादेवन स्थल को धार्मिक पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित करने की सभी सम्भावनाओं को हर हालत में अमली जामा पहनाया जाना चाहिए।
*राजीव शर्मन*