समाजिक व्यवस्था, मानसिक वेदना और शोषण के प्रति चोट करती कहानी- चूहा राम!

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समाजिक व्यवस्था, मानसिक वेदना और शोषण के प्रति चोट करती कहानी- चूहा राम!

-राजीव शर्मन् अम्बिकानगर-अम्ब कलौनी रेलवे स्टेशन रोड अम्ब-ऊना हिमाचल प्रदेश।

देवभूमि न्यूज डेस्क

जब न्याय की कलम लिखना बन्द कर देती है ऐसा ही एक कथा प्रसंग हेड टीचर सोहनलाल जी का है

दौला राम स्कूल के शुरुआती दिनों में ही अब्बल दर्जे का निखट्टू और लूट खसूट करने वाला था। तीसरी क्लास तक पहुंचते पहुंचते सभी अध्यापक/अध्यापिकाओं ने उसे राम भरोसे छोड़ दिया था।

सभी गुरुजनों की राय थी कि वह पक्का घड़ा बन चुका है अब उसमें सुधार की कोई गूंजाईश बाकी नहीं थी। वह प्रातःकालीन सभा में कभी भाग नहीं लेता था। वह जानबूझकर स्कूल देरी से आता और चोरी छिपे क्लासरूम में घुस जाता और बहुत सारे सहपाठियों के बस्तों की तलाशी लेकर उनकी किताबों, कापियों,पैंसिल,दवातों और विभिन्न वस्तुओं को तल कर देता था। चंद्रमणी मास्टर जी ने आज एक बार पुनः उसे चोरी करते हुए पकड़ लिया था। सभी अध्यापक/अध्यापिकाओं को इकट्ठा करके दौलू राम उर्फ चूहा राम चोर के बापू लालमन को स्कूल में तलब किया गया था।
लालमन ने तो हथियार डाल दिए थे कि यह लड़का दौलूराम उसके कहने से बाहर है,गुरूजन ही कुछ सुधार करें तो ठीक है? हैड टीचर सोहनलाल ने कहा कि अब हम इसको स्कूल में और ज्यादा सहन नहीं कर सकते।इसका विद्यालय त्याग प्रमाण पत्र काट दिया है। इसे अब जहां चाहे पढ़ा लो। सारे विद्यार्थियों का जीवन हम दाव पर नहीं लगा सकते है।
लालमन अपने दौलूराम उर्फ चूहा राम को लेकर स्कूल से विद्यालय
प्रमाण पत्र लेकर खिसक लिए थे।
साहुकार बंताराम ने लालमन के गिड़गिड़ाने पर दौलू राम को प्राइवेट स्कूल में दाखिला दिला दिया था। लालमन साहुकार बंताराम का ट्रक ड्राईवर था।
बंताराम इलाके का माना हुआ खुराफ़ाती तस्कर माना जाता था।
एक दिन गणपति बाजार में मास्टर चंद्रमणी और हैड टीचर सोहनलाल सामान खरीदने जा रहे थे। चूहा राम ने पीछे से दोनों पर बारी बारी बार करके लहुलुहान करके भाग गया था। स्थानीय दुकानदारों ने वहां मौजूद लोगों को बताया था कि लालमन ड्राईवर का लड़का चूहाराम ने पीछे से घात लगाए लोहे की राड से वार करके दोनों गुरुजनों को घायल किया और भाग गया।
मामला की शिकायत दर्ज की गई थी और पंचायत ने तहकीकात शुरू की थी।
बहुत बार की बैठकों में कई महीने व्यतीत होने पर भी ड्राईवर लालमन और उसका बेटा चूहाराम नदारद ही पाये गये थे।
यह मामला अब ठंडे बस्ते में पड़ चुका था। मास्टर चंद्रमणी और हैड टीचर सोहनलाल ने भी किनारा कसी कर ली थी। उन्होंने तर्क दिया था कि या तो शहर की अदालत में मुकदमा लड़ा जाये या स्कूली बच्चों को पढ़ाया जा सके?

चूहा राम ने प्राईवेट स्कूल में भी अपनी चोरी चपट्टी की हरकतों के गुल खिला दिए थे। आखिरकार वहां से भी उसे निकाल दिया गया था। चूहा राम बेलगाम होकर नामी चोर बन गया था। अब वह ड्राईवरी पर भी दांव चलाने लगा था। वह छोटी उम्र में ही छोटे बड़े वाहन चलाने लगा था। बंताराम साहूकार को तो तस्करी के लिए ऐसे ही ड्राईवर की तलाश थी।
गांव में पंचायती चुनावों की तैयारी चल रही थी। साहुकार बंताराम ने अपने ड्राईवर लालमन को अपने वार्ड से पंच चुनाव के लिए खड़ा कर दिया था। चूहा राम भी सक्रिय हो कर लालमन के चुनाव का प्रचार प्रसार करने लगा था। साधारण ग्रामीणों को सहला फुसलाकरखरीद फरोख्त की राजनीति से लालमन वार्ड पंच बन गया था। लालमन अब विभिन्न प्रकार के विकास कार्यों ज्यादातर ग्रामीण सड़कों के निर्माण पर सरकारी पैसे का दुरुपयोग करने लगा था। रास्तों के निर्माण में सीमेंट की बोरियों को चोरी करना,ईंटो-टाईलों में भी कमीशनखोरी करता था। रेत बजरी के लिए अपने घर का ट्रैक्टर तो स्थाई तौर पर चलने लगा था। हैड टीचर सोहनलाल की लड़की का विवाह नहीं साल में तय हो गया था। उनकी गली पिछले तीस सालों से कीचड़ से सनी हुई थी। बरसात में तो इस पर चलना नारकीय बन चुका था। हैड टीचर सोहनलाल ने वार्ड पंच लालमन को लिखित तौर पर प्रार्थना पत्र दिया था कि उसके मकान की गली का रास्ता पिछले तीस सालों से नहीं बनाया गया है। अतः इसे प्राथमिक के आधार पर बनाकर राहत प्रदान करवाई जानी चाहिए। लालमन पंच ने जानबूझकर हैड टीचर सोहनलाल के रास्ते को नहीं बनवाया बल्कि अपनी नई बस्ती का पांच सालों का रास्ता पक्का करा टाईलों को बिछवाया था। हैड टीचर सोहनलाल ने इस बारे ग्राम पंचायत प्रधान को भी पत्र लिखकर गुहार लगाई थी। प्रधान/पंच की मिली भगत से हैड टीचर सोहनलाल के रास्ते को बनवाने बारे कोई कार्यवाही नहीं की गई थी। सोहनलाल ने निराश हो कर शहर में उपायुक्त जिला प्रशासन को तत्काल प्रभाव से रास्ता पक्का करवाने हेतु प्रार्थना पत्र दिया था।
जब एक सप्ताह बाद डी०सी० महोदय ने ग्राम पंचायत प्रधान को पत्र लिखकर रास्ते शीघ्रातिशीघ्र बनवाने के निर्देश दिए तो प्रधान/पंच आग बबूला हो चुके थे। उन्होंने एक बार पुनः रास्ता बनवाने बारे कोई कार्यवाही नहीं की थी। एक दिन मास्टर सोहनलाल जी अपनी धर्मपत्नी के साथ पंचायत कार्यालय गये तो उन पर व्यंग्य वाण छोड़े गए। लालमन ने कटाक्ष करते हुए कहा कि आपकी तो बहुत जान पहचान है इसलिए आपका रास्ता तो मुख्यमंत्री जी भी बनवा सकते हैं। अगर तसल्ली नहीं है तो हैड टीचर सोहनलाल जी, आपको प्रधानमंत्री मंत्री जी,महामहीम राष्ट्रपति जी को पत्र लिखकर तत्काल प्रभाव से रास्ता पक्का करवाना चाहिए।
आपको यहां पंचायत कार्यालय में आने की कोई आवश्यकता नहीं है।
आज जिंदगी में पहली बार हैड टीचर सोहनलाल जी सपत्नीक शर्मिंदा होकर निराशा में घर लौट आए थे। रास्ते में लालमन की पत्नी और खुराफ़ाती चूहाराम ने भी हैड टीचर सोहनलाल जी पर कटाक्ष किया था।
हैड टीचर सोहनलाल जी को आज रात नींद नहीं आ रही थी। वह रास्ते निर्माण को लेकर अत्याधिक चिंतित थे। वह पिछले तीस सालों से रास्ते के निर्माण को लेकर विभिन्न पत्राचारों का रिकॉर्ड खंगाल रहे थे। मुताला करने वाले सभी खबरची वर्तमान में बंताराम ने खरीद लिए थे। वह इस समाजिक न्याय के खिलाफ पानी का अक्षर भी नहीं लिखते थे। हैड टीचर सोहनलाल गहन चिंतन और निराशा में थक हार चुके थे। उनकी लिक्खा -पढ़ी की सारी मेहनत पिछले तीस सालों से बेकार साबित हो चुकी थी। इस समाजिक अन्याय से निजात दिलाने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था। ऐसे में एकाएक मास्टर जी के भतीजे नचिकेत ने मिडिया समाचार पत्रों में शिकायत की सलाह दी थी। एक सप्ताह में सभी प्रमुख समाचार पत्रों में तीस सालों से रास्ता ना बनवाने व जानबूझकर अनदेखी के समाचार प्रकाशित हो गये थे। हैड टीचर सोहनलाल जी का भतीजा नचिकेत मिडिया से जुड़ा हुआ था। उसने सभी समाचार पत्रों की रास्ते को लेकर प्रकाशित खबरों की कतरनों को मुख्यमंत्री जी, राज्यपाल जी, प्रधानमंत्री जी व महामहीम राष्ट्रपति जी को मामले में उच्च स्तरीय जांच आदेश की अपील की थी। इस बारे आगामी आवश्यक कार्रवाई का बेसब्री से इंतज़ार था।
लालमन ड्राईवर पंच ने अपने अड़दली दूत को हैड टीचर सोहनलाल के घर पर इस आशय के साथ भेजा था कि एक सौ पचास मीटर पक्का रास्ता निर्माण और टाईलों पर पांच लाख रुपए का बजट प्रावधान व्यय होना है। दूत ने हैड टीचर सोहनलाल से पच्चीस हजार रुपए का शुक्राना बतौर रास्ते का अविलंब निर्माण की एवज में मांगा था। हैड टीचर सोहनलाल जी ने साफ इंकार कर दिया था कि वह सारी उम्र एक साधारण अध्यापक की हैसियत से मेहनत मुशक्कत का वेतन पाते रहे हैं। वह पच्चीस हजार क्या? इस बारे वह पच्चीस रुपए भी नहीं देंगे। दूत बेरंग निराश होकर ड्राईवर लालमन पंच के पास वापस आ गया था। उधर दौलाराम उर्फ चूहा राम को जब सारी स्थिति का पता चला कि हैड टीचर सोहनलाल अपनी बेटी की शादी अगले महीने करने जा रहा है। उसने अरबे खरबे लगाये कि ऐसे मौके पर हैड टीचर के घर पर लड़की के विवाह के लिए आभूषण और नगदी तो अवश्य ही मिल जायेगी। ऐसी बदनियती की मनसा से चूहा राम एक रात पिछवाड़े की गौशाला के पास रखी पौड़ी की आड़ से घर के कमरे में प्रवेश कर गया। सर्दियों की आधी रात का समय था। हैड टीचर सोहनलाल जी व उनकी धर्मपत्नी गहरी नींद में सो रहे थे।
मास्टर सोहनलाल जी बेटी भारती कच्ची निद्रा में थी। उसने किसी के अचानक कमरे में आने की आहट सुन ली थी। वह सावधान हो गई थी। उसने कमरे के साथ वाली खिड़की पर घास काटने वाली दरांती संभाल ली थी। जैसे ही चूहा राम उसके कमरे में दाखिल हुआ उसने अंधेरे में ही उसकी आकृति का अनुमान लगाकर जोर से दरांती चला दी थी। दरांती के एक प्रहार से ही चूहा राम के सिर से खून बहने लगा वह बुरी तरह छटपटाने लगा था। भारती ने उसको खिड़की से नीचे गौशाला की ओर फैंक दिया था। धड़ाम की आवाज से हैड टीचर सोहनलाल व उनकी पत्नी जाग गये थे। वह अपनी बेटी भारती के कमरे में प्रवेश कर गये तो वहां खून पड़ा हुआ था। भारती ने निडर होकर बताया कि एक जंगली बिल्ला अंदर घुस आया था। उसने दरांती चला कर उसे ठिकाने लगा दिया है। अंधेरे का लाभ उठा कर चूहा राम खून से लथपथ होने के बावजूद भागने में कामयाब हो गया था।
एक सप्ताह बाद मुख्यमंत्री जी ने ग्राम पंचायत प्रधान को इस रास्ते के तत्काल प्रभाव से निर्माण के आदेश दिए थे। इस पर भी वार्ड पंच लालमन और प्रधान चुप्पी साधे हुए थे। वह बहुत मोटी चमड़ी के ढीठ मालिक थे। चूहा राम ने हैड टीचर सोहनलाल के भतीजे नचिकेत को गणपति बाजार में सरेआम पीट कर लहूलुहान कर दिया था। हैड टीचर सोहनलाल जी ने पत्राचार का मोर्चा खोल दिया था। वह साधारण अध्यापक और कुछ कर भी नहीं सकते थे। हैड टीचर सोहनलाल के एक वकील शिष्य ने सारे मामले की नजाकत भांपते हुए सूचना अधिकार आर०टी० आई० का सदुपयोग करके रास्ते निर्माण के प्रस्ताव की प्रतिलिपि और विभिन्न जानकारियां हासिल करके उच्च न्यायालय में अपील दायर कर दी थी।
पंचायत प्रधान और पंच पर बहुविधि जांच का शिकंजा कसने लगा था। प्रधान और पंचायत पंच लालमन जानबूझकर इस रास्ते के निर्माण में कोताही बरतने के दोषी पाये गये थे। अदालत ने एक महीने के भीतर हैड टीचर सोहनलाल जी के घर की गली का रास्ता निर्माण करने के आदेश दिए थे। इसमें कानूनी सजा का भी प्रावधान किया गया था।
इससे पंचायत प्रधान व पंच लालमन की दुर्भावना उजागर हो गई थी।
कुदरत पूर्णतः हैड टीचर सोहनलाल जी के साथ जी। हैड टीचर सोहनलाल जी के घर का रास्ता एक सप्ताह में कानूनन बन कर तैयार हो गया था। नये साल में हैड टीचर सोहनलाल की लड़की की शादी की तैयारियां पूरे जोरों पर चल रही थी। निर्धारित समय पर बारात का गांव में आगमन हुआ था। बारातियों को दावत दी जा रही थी। आज हैड टीचर सोहनलाल जी बहुत प्रसन्न थे।अगली प्रात : तारों की छांव में दुल्हन को विदाई दी गई थी। सारे गांव का वातावरण शान्त हो गया था।
एकाएक दोपहर को सारे गांव में कोहराम मच गया था। मिडिया से जुड़े भतीजे नचिकेत ने गांव वासियों को दुखद समाचार दिया था कि पहाड़ी में बादल फटने से आई बाढ़ में बंताराम, ड्राईवर लालमन पंच और उसका लड़का चूहाराम बाढ़ में बह जाने से लापता है।
सभी इस समाचार से गमगीन थे। एक सप्ताह बाद नदी से बंताराम, ड्राईवर लालमन पंच और चूहा राम के शव बरामद हो गए थे।