जिला ऊना के राज्य स्तरीय सोमभद्रा-उत्सव को पुनः बहाल किया जाना चाहिए-राजीव शर्मन्

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जिला ऊना के राज्य स्तरीय सोमभद्रा-उत्सव को पुनः बहाल किया जाना चाहिए-राजीव शर्मन्

देवभूमि न्यूज डेस्क
ऊना

सोमभद्रा-स्वां संरक्षण समिति संयोजक व अम्बिकानगर-अम्ब साहित्य परिषद् के अध्यक्ष राजीव शर्मन् ने जिला ऊना में एक बार पुनः सोमभद्रा-उत्सव को आयोजित करवाने की मांग दोहराई है। राजीव शर्मन् ने कहा है कि सोमभद्रा-उत्सव जिला ऊना की एक विशेष पहचान बनकर पूर्व में समूचे हिमाचल प्रदेश में समरसता का संचार करवाता आया है।

सोमभद्रा-उत्सव को जिला ऊना के स्थापना दिवस के सितम्बर माह में आयोजित करने की घोषणा की जानी चाहिए। उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर जी से इस बारे शीघ्रातिशीघ्र जनहित में इस उत्सव का राज्य स्तरीय आयोजन बहाल करने की पुरजोर अपील की है। जिला ऊना में प्राचीन काल से ही स्वर्ग से बहने वाली सोमभद्रा-स्वां नदी का अस्तित्व बरकरार है। जिला ऊना के इतिहास में सोमभद्रा-स्वां नदी का प्रमुख स्थान है। इसी सोमभद्रा-स्वां नदी के सानिध्य में दो हजार दस के दशक में हिमाचल प्रदेश सरकार ने “सोमभद्रा-उत्सव” का संचालन किया था। सोमभद्रा-उत्सव एक राज्य स्तरीय उत्सव के तौर पर बहुत सालों तक लगातार आयोजित किया गया है। शिवालिक धौलाधार पहाड़ियों की श्रृंखलाओं में जिला ऊना की पौराणिक संस्कृति यहां की जनपद में रची बसी है। अपने अस्तित्व में बतौर जिला ऊना बनने से पहले पंजाब का अभिन्न अंग था। कुछ पहाड़ी बहुल क्षेत्र जिला कांगड़ा में भी सम्मिलित रहे हैं। 1 सितम्बर 1972 को जिला बनने पर इसकी पांचों तहसीलों का निर्माण किया गया है।
इन पांचों तहसीलों में जिला ऊना सदर,हरोली, गगरेट पंजाबी बहुल क्षेत्र थे जबकि अम्ब और बंगाणा पहाड़ी भाषा, पहाड़ी धर्म संस्कृति बहुल क्षेत्र थे जिसमें जिला कांगड़ा की संस्कृति का आदान-प्रदान व प्रभाव निश्चित तौर पर देखा जा सकता था।
कालांतर में जिला ऊना एक समृद्ध धार्मिक सांस्कृतिक हिमाचल प्रदेश में एक बहुआयामी व अलग पहचान विकसित हुई है। वर्तमान में जिला ऊना की पांच तहसीलों ऊना सदर,हरोली, गगरेट,बंगाणा और अम्ब सुविख्यात है। जिला ऊना में पांच विधानसभा क्षेत्रों ऊना सदर,कुटलैहड़,गगरेट,सन्तोषगढ़ एवं चिंतपूर्णी से भी इसकी पहचान मानी जाती है। वास्तव में जिला ऊना में विभिन्न पांडवकालीन महातीर्थ शिवालयों जिनमें श्री द्रोणाचार्य शिवबाड़ी गगरेट,श्री सदाशिव ध्यूंसर महादेव और चिंतपूर्णी के अम्ब उपमंडल तहसील मुख्यालय में श्री गौरी गंगा महादेवन को महातीर्थ श्री छोटा हरिद्वार उपनाम से भी अलंकृत किया गया है। आजादी से पहले जिला ऊना का दौलतपुर और जिला मुख्यालय का ऊना स्वतंत्रता सेनानियों का संग्राम गढ़ माना जाता रहा है। इन इलाकों में पंडित जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गांधी जी और बुलबुल सरोजिनी नायडू जी ने जनसभाओं को संबोधित किया था।
जिला ऊना को धार्मिक स्थलों का गढ़ माना जाता रहा है जिसमें नानक वंशज किला बेदी ऊन्ना गुरूद्वारा प्रमुख हैं।
वर्तमान परिपेक्ष्य में जिला ऊना में एक बार पुनः राज्य स्तरीय सोमभद्रा-उत्सव को पुनः संचालित करने की एक बार पुनः कोशिश दोहराई जानी चाहिए।
सोमभद्रा-उत्सव के माध्यम से जिला ऊना की पौराणिक धर्म संस्कृति व पर्यटन का आदान-प्रदान सुनिश्चित करने की दिशा में वर्तमान सरकार को सोमभद्रा-उत्सव को पुनः बहाल किया जाना चाहिए।सोमभद्रा-उत्सव के माध्यम से जिला ऊना की सोमभद्रा-स्वां नदी का जीर्णोद्धार और इस पर पर्यावरणीय दृष्टि से मंडराते खतरनाक बादलों को भी छांटा जाना चाहिए।