रेल मंत्री को श्रद्धांजलि।

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रेल मंत्री को श्रद्धांजलि।

-राजीव कुमार शर्मन् सोमभद्रा-स्वां नदी बाजार रेलवे स्टेशन रोड अम्ब-ऊना हिमाचल प्रदेश।

देवभूमि न्यूज डेस्क

गांव के वृद्ध बावा जी में दिवंगत रेल मंत्री की यादें पचास सालों से यथावत तरोताजा बनी रहती है।
वृद्ध अतीत में खोया है,कभी एक रेलगाड़ी तो कभी दूसरी रेलगाड़ी रेलवे लाईन पर दौड़ती-भागती चली जाती है।।
वृद्ध दिवंगत रेल मंत्री के लोक कल्याणी ऐतिहासिक कार्य पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर गौरवान्वित महसूस करता है।
वह सर्वशक्तिमान ईश्वर से दिवंगत रेल मंत्री की आत्मिक शांति एवं बैकुंठवास की विनम्र प्रार्थना करता है।।

उधर स्वर्गधाम में धर्मराज लोककल्याण भावनाओं और कार्यों हेतु प्राणी का लेखा जोखा प्रस्तुत करते हैं। वह दिवंगत रेल मंत्री की भावनाओं अनुरूप उनको एक बार दोबारा अधूरा काम पूरा करने को भेजना चाहते हैं।
दिवंगत रेल मंत्री जी, साफ इन्कार कर देते हैं, धर्मराज का प्रस्ताव बड़ी ही निराशा से एकदम ठुकरा देते है।।
धर्मराज रेलमंत्री से जबाव तलब करते , सभी प्राणी अपने को पुनः स्थापित करते,तू क्यों इन्कार करता है? ऐसी क्या मजबूरी? दोबारा जन्म नहीं लेना चाहता है।।
दिवंगत रेलमंत्री बोला , मैं अपने प्रशंसकों की याद में आज भी जिंदा रहता हूं। मौकापरस्त , भ्रष्टाचार बातावरण से दूर ही रहना चाहता हूं।‌। जिंदा रहने के लिए अपने सिद्धांतों से समझौता करना पड़ता है। हर रोज नई मुसीबत, काम भी सारा अधूरा रहता है।।
वह नगर का मसीहा वयोवृद्ध,सारा इतिहास जानता है।
दादाजी ! नित्यप्रति रेलवे स्टेशन की सैर करने जाते हैं। शाम को घर के पास रेलवे लाईन पर बनी थी,अब टूटे स्थल पर एक शिलान्यास पट्टिका की जगह पूजते हैं।।
बच्चे मूकदर्शक बनकर दादाजी की अन्तर्मन की भावनाओं से बेखबर है। बच्चों को भी उनकी अलौकिक दुनियां एकदम बेअसर है।। यह क्रम सालों साल चलता तो बड़ा पोता विस्मित कौतूहल प्रश्न पूछता है। सारे बाल-गोपालों को इकट्ठा कर दादाजी जी से पूजा का रहस्य जानना चाहता है।।
वृद्ध पत्थर की शिला पर दीप-दान करते हुए, दिवंगत रेल मंत्री जी को याद करता रहता है, अपने नगर के विकास मसीहा को! सर्व जनहिताय विकासवादी मसीहा ,उस नगर का कायाकल्प करा गया है!!
सभी बच्चे पूछते हैं, नेपथ्य से,”दादाजी! दादाजी!! किसकी पूजा करते हो? कौन सा भगवान है? हमें भी जल्दी बतलाओ कौन है?
वह वृद्ध बच्चों की उत्सुकता को दुलारता है, उन्हें प्यार से निहारता है।
वृद्ध बालकों को बड़े लाड़-प्यार से संबोधित करता जाता है।।
प्यारे बच्चों! इस गांव में पचास साल पहले एक रेलमंत्री आया! उसने सैनिकों की खातिर ब्राडगेज रेलवे विस्तार का सपना संजोने रेलवे स्टेशन का शिलान्यास करवाया!! दुर्भाग्यवश वह बम विस्फोट में काल का ग्रास बन गया। वह रेलमंत्री मेरी स्मृतियों में आया।। जिस दिन उसने रेलवे स्टेशन का शिलान्यास किया। मुझसे मुखातिब हो सारा भाषण सुना दिया।। इस गांव से रेलगाड़ी जम्मू-कश्मीर तक सैनिकों को रश्द पहुंचायेगी। गांव से नये नगर की नींव पड़ जायेगी।। इसी पत्थर समीप शिलान्यास पट्टिका को मौकापरस्तों ने उड़ा दिया। उस विकास के मसीहा को एकदम भुला दिया।‌।
रेलगाड़ी की गगनचुंबी गूंज से जब बच्चे किलकारियां मारते हैं। वयोवृद्ध नेत्र सजल होकर, उस रेलमंत्री का नाम जोर जोर से पुकारने लगते है।
वह अजर अमरत्व का रेल मंत्री लाल टेन लेकर प्रकट हो जाता है। वृद्ध की आंखों को दिन में धोखा हो जाता है।। संवाद कर बैठता हूं,कौन रेलवे गार्ड हो या चौकीदार? वृद्ध पूछता है तो दिवंगत रेलमंत्री जबाव देता है। अरे वृद्ध, आधुनिक तकनीक के चलते, मुझे बिल्कुल नहीं पहचानते?।‌।
मैं वहीं रेलमंत्री ललित नारायण मिश्रा हूं जिसका भाषण तुमने अग्रिम पंक्ति में बैठकर सुना। वृद्ध भयभीत होकर सवाल करता हूं, लेकिन तुम तो समस्तीपुर बिहार के नक्सली विस्फोट में मारे गए।।
रेलमंत्री अजब का अट्हास करता, वृद्ध डरता है। वह बोले, लोगों की भावनाओं में आज भी जिंदा रहता हूं।। हर रोज इस रेलवे स्टेशन, रेलवे लाईन पर सुबह-शाम सैर करता हूं। अपने द्वारा शिलान्यास की पट्टिका को तलाशता रहता हूं।। जब तेरे जैसे सच्चे श्रद्धालु मुझे श्रद्धासुमन अर्पित करते और बच्चे रेल के आने से , खुशी से चिल्लाते हैं। स्वर्गलोक के धर्मात्मा मेरी सशरीर रूह को यहां छोड़ जाते हैं।। वहां धर्मराज विकासोन्मुखी रेलवे विस्तार का आंकलन करवाते हैं। मेरी वहां भी मुक्त कंठ से प्रशंसा करवाते रहते हैं।। मेरी प्रार्थना व अपील पर वह मुझको मृत्युलोक में पुनः भेजने को तैयार हो जाते हैं। मैं दोवारा लौटना नहीं चाहता, यहां बार-बार मरना पड़ता जन्म लेना पड़ता है।। मैं लोगों की भावनाओं में ही जिंदा रहना चाहता हूं। तेरे जैसे भक्त जनों की यादों में ही आना चाहता हूं।। रेलमंत्री आह्लादित होकर अट्हास करता है,उसकी आदमकद प्रतिमा दीपदान पत्थर पर प्रकट हो जाती है। वृद्ध डर जाता है, दिवंगत मंत्री ढांढस बंधाता है।। दिवंगत रेल मंत्री बोला! मैं अपना काम बखूबी निभाता रहा हूं वृद्ध,तू भी अपना धर्म निभाता रह, मैं अपने लोक से भी अपना कल्याण कारी धर्म निभाता हूं।।

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